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एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) ने किया अपने 25वें दीक्षांत समारोह का आयोजन
अहमदाबाद, 21 मई 2026: एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद, जिसे भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में मान्यता प्राप्त है, ने 18 मई 2026 को अपने अहमदाबाद परिसर में शैक्षणिक कार्यक्रमों के 25वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया। इस अवसर की शोभा मुख्य अतिथि श्री विनय कुमार सक्सेना, माननीय उपराज्यपाल, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने बढ़ाई। इस अवसर पर श्री राकेश शर्मा, अध्यक्ष – ईडीआईआई एवं प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आईडीबीआई बैंक लिमिटेड; डॉ. सुनील शुक्ला, महानिदेशक, ईडीआईआई; तथा ईडीआईआई गवर्निंग बोर्ड के प्रतिष्ठित सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें श्री गोपाल झा, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमई एंड सप्लाई चेंज फाइनेंस), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई; डॉ. मिलिंद कांबले, संस्थापक अध्यक्ष, दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डीआईसीसीआई), पुने; श्री राजेश गांधी, मेनेजिंग डायरेक्टर, वाडीलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अहमदाबाद तथा डॉ. ओ. पी. गोयल, एडवाईजर टू सीईओ, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, नई दिल्ली शामिल थे।
25वें दीक्षांत समारोह में विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 98 विद्यार्थियों और स्कोलर्स को डिप्लोमा तथा उत्तीर्णता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस वर्ष के स्नातक बैच में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट – एंटरप्रेन्योरशिप (पीजीडीएम-ई) के 76 विद्यार्थी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट – इनोवेशन एंटरप्रेन्योरशिप एंड वेंचर डेवलपमेंट (पीजीडीएम-आईईवी) के 8 विद्यार्थी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट – ऑनलाइन (पीजीडीएम-ऑनलाइन) के 11 विद्यार्थी तथा फेलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (एफपीएम) के 3 विद्यार्थी शामिल हैं।
जहां पीजीडीएम-ई के 38 विद्यार्थियों ने अपनी 5 वर्षीय परिप्रेक्ष्य विकास योजना को अंतिम रूप दिया है, वहीं पीजीडीएम-ई और पीजीडीएम-आईईवी कार्यक्रमों के 46 विद्यार्थियों ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। विद्यार्थियों ने स्टूडेंट स्टार्ट-अप इनोवेशन पॉलिसी के अंतर्गत अनुदान स्वीकृतियां भी प्राप्त की हैं। जिन व्यावसायिक क्षेत्रों की पहचान की गई है, उनमें प्लास्टिक वेस्ट रीसाइक्लिंग प्लांट, एआई प्लेटफॉर्म्स, बाल मानसिक स्वास्थ्य, लैंडस्केपिंग एंड हॉर्टिकल्चर सॉल्यूशंस, पेट हेल्थ टेक इकोसिस्टम तथा बायोडिग्रेडेबल पेपर बोतलों का निर्माण शामिल हैं।
छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए, मुख्य अतिथि एवं केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के माननीय लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा, “महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने के बाद अक्सर यह भ्रम हो जाता है कि हमारी शिक्षा पूरी हो चुकी है। लेकिन यह सच नहीं है। सीखना एक आजीवन और निरंतर चलने वाली यात्रा है। निरंतर बदलती दुनिया में आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति में जिज्ञासा, कुछ नया सीखने की उत्सुकता और एक बेहतर पेशेवर के रूप में विकसित होने की इच्छा बनी रहनी चाहिए। आपके आसपास की दुनिया हमेशा आपसे यह अपेक्षा करेगी कि आप ज्ञान की तलाश में एक विद्यार्थी और शोधार्थी बने रहें। ज्ञान प्राप्त करने की यही प्यास आपकी क्षमताओं को मजबूत करेगी और आपको आज की निरंतर बदलती दुनिया का सामना करने के लिए तैयार बनाएगी। इसलिए मैं स्नातक हो रहे विद्यार्थियों से कहना चाहूंगा कि वे उत्कृष्ट उद्यमी बनें, नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि यही सबसे बड़ी सेवा है जो आप स्वयं के लिए और देश के लिए कर सकते हैं। अपने लक्ष्य निर्धारित करें, उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर परिश्रम करें और स्वयं को राष्ट्र तथा मानवता की सेवा के लिए समर्पित करें।”
छात्रों को संबोधित करते हुए, ईडीआईआई के अध्यक्ष तथा आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एंड मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्री राकेश शर्मा ने कहा, “नवाचार उद्यमिता की आधारशिला बना हुआ है। ईडीआईआई के पूर्व विद्यार्थियों ने इस भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है, और मैं स्नातक हो रहे विद्यार्थियों से आग्रह करता हूं कि वे जीवनभर सीखते रहने की सोच अपनाएं — स्थापित धारणाओं पर प्रश्न उठाएं, विकल्पों की तलाश करें और चुनौतियों का सामना रचनात्मकता एवं उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण के साथ करें। अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता से परिभाषित इस दुनिया में अनुकूलन क्षमता अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। हालांकि, मैं एक बार फिर यह दोहराना चाहूंगा कि एक सच्चा उद्यमी कभी भी बाधाओं से निराश नहीं होता। इसके विपरीत, चुनौतियां आपके संकल्प को और मजबूत करें तथा आपके लक्ष्य के प्रति एकाग्रता को और अधिक धार दें। दृढ़ता, संकल्प और साहस के साथ आपको बाधाओं का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।”
डॉ. सुनील शुक्ला, महानिदेशक, ईडीआईआई ने कहा, “पिछले चार दशकों से अधिक समय के दौरान हमने उद्यमिता की भावना में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। आज सभी नीतियों और विकास मॉडलों के बीच उद्यमिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। स्टार्ट-अप की लहर युवाओं को उद्यमिता को एक करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। मुझे यह कहते हुए भी प्रसन्नता हो रही है कि उद्यमियों को तैयार करने में प्रशिक्षण और मेंटरशिप के महत्व को पहले से कहीं अधिक मान्यता मिली है। आज समाज किसी उद्यम और उद्यमी के विकास में ज्ञान, कौशल और दृढ़ संकल्प की शक्ति को स्वीकार करता है।”
कार्यक्रम का समापन डॉ. सुनील शुक्ला, महानिदेशक, ईडीआईआई द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


